भारी बारिश और भूस्खलन से उत्तराखंड बेहाल, चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जैसे ही मौसम और मार्ग की स्थिति सामान्य होगी, यात्रा दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
गढ़वाल आयुक्त ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्गों पर मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया जाए और उन्हें हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं एवं जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
सबसे अधिक असर चमोली जिले में देखने को मिल रहा है, जहां मूसलाधार बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों और कई राज्य मार्गों पर मलबा आने से यातायात बाधित हो गया है। नदियां और गदेरे उफान पर हैं, जबकि भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है।
देर रात हुई तेज बारिश से नारायणबगड़ बाजार में भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया। इसके चलते सिमली–ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग कुछ समय के लिए बंद रहा। बाजार की कई दुकानों में पानी और मलबा भरने से व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
उधर, थराली–देवाल मोटर मार्ग पर घाघली गधेरे के पास मलबा आने से सड़क बंद हो गई थी। लोक निर्माण विभाग ने मशीनों की मदद से मार्ग को अस्थायी रूप से यातायात के लिए खोल दिया है। हालांकि, लगातार मलबा आने की घटनाओं से राड़ीबगड़ क्षेत्र के ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घरों पर लगातार खतरा बना हुआ है और वे असुरक्षा के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।
लगातार बारिश के कारण पिंडर नदी भी उफान पर है। जिले के अधिकांश नदी-नाले विकराल रूप धारण कर चुके हैं। वहीं, थराली–डूंगरी मोटर मार्ग भी कई स्थानों पर बाधित होने से सोल घाटी के लोगों को तहसील मुख्यालय तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने संबंधित विभागों को संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी और अन्य मशीनें तैनात रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोला जा सके और यात्रियों व स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
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