सूचना आयोग ने दिया आदेश, अधीनस्थ न्यायपालिका में शिकायतों की प्रक्रिया होगी सार्वजनिक
देहरादून: उत्तराखंड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि अधीनस्थ न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों और न्यायाधीशों के खिलाफ दर्ज शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी अपीलकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाए। यह फैसला देश में पहली बार न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में लिया गया कदम माना जा रहा है। आदेश सूचना आयोग की मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में पारित किया गया।
मामला अपील संख्या 43293/2025-26 से जुड़ा है। आईएफएस अधिकारी संजय चतुर्वेदी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(3) के तहत यह अपील दायर की थी। अपील में अधीनस्थ न्यायपालिका के सेवा नियम, आचरण नियम, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी। विशेष रूप से, 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच दर्ज शिकायतों की संख्या, अनुशासनात्मक कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं।
लोक सूचना अधिकारी (नैनीताल हाईकोर्ट) ने जानकारी देने से इनकार किया और इसे गोपनीय तथा संवेदनशील बताया। अपीलकर्ता इसके बाद सूचना आयोग में द्वितीय अपील लेकर गए।
सूचना आयोग ने कहा कि केवल यह कहना कि सूचना गोपनीय है, सूचना न देने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायतों की संख्या और निस्तारण प्रक्रिया सार्वजनिक हित में आती है, लेकिन किसी न्यायाधीश या अधिकारी की व्यक्तिगत पहचान नहीं बताई जाएगी। आयोग ने निर्देश दिए कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेकर एक महीने के भीतर जानकारी अपीलकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम है। इससे यह पता चलेगा कि अधीनस्थ न्यायपालिका में शिकायतों की निगरानी और कार्रवाई कैसे की जाती है। इसके साथ ही यह भविष्य में RTI के माध्यम से न्यायिक प्रशासन से जानकारी मांगने वालों के लिए एक नजीर भी बनेगा।
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