आईएमए पासिंग आउट परेड: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल, थलसेना और वायुसेना में एक साथ 14 अफसर शामिल

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देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड शनिवार को ऐतिहासिक बन गई, जब एनडीए के पहले महिला बैच की 9 कैडेट्स भारतीय थल सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। इसी दिन हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी से 5 महिला कैडेट्स ने भी कमीशन प्राप्त किया। इस तरह एक ही दिन भारतीय सशस्त्र बलों को कुल 14 महिला अफसर मिले।

आईएमए में आयोजित 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने परेड की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया।

यह अवसर भारतीय सेना के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार एनडीए के महिला बैच की कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में अधिकारी का पद संभाला है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं को एनडीए में प्रवेश का रास्ता मिला था, जिसके बाद यह पहली सफल बैच सामने आई है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस उपलब्धि को देश की बदलती तस्वीर और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल सैन्य इतिहास नहीं, बल्कि भारत के विकसित होते नेतृत्व मॉडल का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ टीम को आगे बढ़ाना है। राष्ट्रपति ने नव-नियुक्त अफसरों से कहा कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है, जिसे पूरी निष्ठा से निभाना होगा।

राष्ट्रपति ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीक आधारित युद्ध और चुनौतियों के लिए सेना को लगातार तैयार रहना होगा। उन्होंने अधिकारियों से जीवनभर सीखते रहने और नैतिक मूल्यों को मजबूत रखने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि एक अच्छे सैन्य अधिकारी की पहचान केवल नेतृत्व से नहीं, बल्कि अपने जवानों के प्रति संरक्षक की तरह व्यवहार करने से होती है।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने सभी कैडेट्स, उनके परिवारों और प्रशिक्षकों को बधाई दी। साथ ही मित्र देशों से आए कैडेट्स की भी सराहना की। उन्होंने आईएमए के आदर्श वाक्य ‘वीरता और विवेक’ को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।